अलीगढ़

दुर्गा अष्टमी, माता महागौरी 23/24 अक्टूबर को

आश्विन शुक्ल पक्ष दिन शुक्रवार,उत्तराषाढ़ा नक्षत्र धृतियोग, बब करण के शुभ संयोग में 23अक्टूबर 2020 को प्रातः 06:56 बजे से ही दुर्गा अष्टमी लग रही हैजो 24 अक्टूबर शनिवार को प्रातः6:58बजे तक रहेगी वही उदया तिथि को मान्यता देने वाले व्यक्ति 24 अक्टूबर दिन शनिवार को ही दुर्गाष्टमी मनाएंगे जिसमें इसदिन ही माता महागौरी की पूजामान्य रहेगी, जिन परिवारों में या जिन माताओं बहनों के यहां अष्टमी के दिन कन्या पूजन होता है उन माताओं बहनों को सप्तमी वाले दिन गुरूवार 22 अक्टूबर को और उदया तिथि के हिसाब से अष्टमी मानने वाले भक्तों को 23 अक्टूबर को व्रत रखना उचित रहेगा

🏵माता महागौरी को गुलाबी रंग पसंद है भोग में नारियल इससे पसंद हैइससे संतान संबंधी परेशानियोसे हमेशा-हमेशा को मुक्ति मिलती है,
🔥माता महागौरी की पूजा पाठ, पूजा विधि और माता के विषय में ,कन्या लांगुर जिमाने के शुभ समय के विषय में विस्तृत जानकारी दे रहे हैं

🍁मां दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम माता महागौरी है नवरात्र के आठवें दिन इनकी पूजा का विधान है सौभाग्य, धन संपदा ,सौंदर्य और स्त्री जिनत गुणों की अधिष्ठात्री देवी महागौरी हैं ,18 गुणों की प्रतीक महागौरी अष्टांग योग की अधिष्ठात्री देवी हैं वहधन-धान्य, ग्रहस्थी ,सुख और शांति की प्रदात्री है महागौरी इसी का प्रतीक है इस गौरता कि उपमाशंख,चंद्र और कुंद के फूल सेकी गई है इनके समस्तवस्त्र आभूषण आदि स्वेतहै.अपने पार्वती रूप में इन्होंने भगवान शिव को पति के रुप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी इससे उनका शरीर एकदम काला पड़ गया था तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगाजी के पवित्र जल से धोया (छिड़का )तो वह विद्युत प्रभाके समान अत्यंत कांतिमान गौर (अति सुंदर) हो गई और वह माता महागौरी हो गई महागौरी सृष्टि का आधार है मां गौरी की अक्षत सुहाग की प्रतीक देवी हैं इनकी उपासना से भक्तों के सभी पाप संतापदैन्य दुख उनके पास कभी नहीं आतेहै.मां महागौरी का ध्यान सर्वाधिक कल्याणकारी हैजीनघरोमै अष्टमी पूजन किया जाता है और अष्टमी के दिन जो माताएं बहने अपने नवजात शिशु की दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य की रक्षा के लिए पूजा याव्रत रखती हैं या पथवारी माता की पूजा करती हैं उन सभी के लिए अष्टमी का व्रत माता महागौरी की पूजा अत्यंत ही कल्याणकारी व महत्वपूर्ण होती है
🌹पूजा पाठ एवं कन्या लांगुरा जिमाने का शुभ मुहूर्त विश्व प्रसिद्ध चौघड़िया मुहूर्त अनुसार प्रातः 06:26से लेकर दोपहर 10:50 तक “चर लाभ एवंअमृत” के तीनअत्यंत ही शुभ मुहूर्त रहेंगे जोपूजा पाठहवन यज्ञ अनुष्ठान के लिए बहुत ही सर्वोत्तम कहे जा सकते हैं इसमें नौकरी पेशा और पढ़ने वाले बच्चों के लिएपूजाकरना सर्वोत्तम रहेगा, इसके बाद(शुभ)का एक और चौघड़िया मुहूर्त आ रहा है जो दोपहर 12:20 से दोपहर 01:50 मिनट तकरहेगा इसमें व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए पूजा पाठ करना व जिन कन्याओं की शादी में विलंब है व जिन माताओं बहनों के संतान में दिक्कत परेशानियां हैं उन लोगों के लिए पूजा पाठ करना सर्वोत्तम रहता है
🌺इसके लिए माता बहने प्रातः काल उठकर साफ शुद्ध होकर पूजा घर में गंगाजल को छिडकेउसे शुद्ध करें माता को नए वस्त्र आभूषण, सजावट ,सिंगार करके पूजा पूजा घर कोसुन्दरबनाये पूजा घर में 2से9 वर्ष तक की कन्या से हल्दी, रोली या पीले चंदन काहाथका(थापाचिन्ह)लगवाएं जिससे देवी मां का स्वरूप मानते हैं बच्ची को यथायोग्य दक्षिणा या उपहार देकर विदा करें उसके पैर छुए आशीर्वाद लें इसके बाद सपिरवार वहां बैठ कर पूजा पाठ हवन यज्ञ अनुष्ठान माला जाप दुर्गा सप्तशती का पाठ आदि करें तत्पश्चात कन्या लागुराअवश्य जिमाये बचे हुए प्रसाद मैसे थोड़ा सा भोग प्रसाद अवश्य लें इसे माता का भोग प्रसाद समझकर ग्रहण करें इससे ही व्रत का पारण होता है

🌻 पौराणिक मंत्र🌻
🍁सर्व मंगल मांगल्यै शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्यै त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते”

पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष नंबर-9756402981,7500048250

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